कानपुर का हाहाकारी मुँहनोचवा !!!

जैसे आजकल चोटी कटवा का सुर्रा चलायमान है उसी तरह 12-13 बरस पहले कानपुर में "मुँहनोचवा" का प्रकोप हुआ था। दैया- दैया करके कई मोहतरमाएँ अटरिया से कूद गई। आस पड़ोस के लोग रात-रात भर छत आकर पहरा देने की जुगत भिड़ाते और जरा सा हल्ला मचते ही हवा हो जाते। अखबार के दफ्तरों में फोन की घण्टियाँ 24×7 बजती। कितनो का मुँह नुचा इसके पुख्ता सबूत कभी नही मिले। हाँ हफ्ते से ज्यादा समय माहौल में खौफ पसरा रहा। कुछ मामलात तो ऐसे थे की लोगो ने खुद ही अपने मुँह नोच डाले थे, ध्यानाकर्षण हेतु  .....कानपुर पुलिस मुँहनोचवा की सच्चाई का पता कभी नही लगा पायी।....
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