लघुकथा: राजनीति एक छलावा

राजनीति से भ्रष्टाचार को उखाड़ फेकेंगे, क्या आप साथ देंगे? हम मिलकर लड़ेंगे अंतिम साँस तक लड़ेंगे, क्या आप साथ देंगे? नेता जी ऊर्जा से भरा भाषण देकर लाखों की भीड़ में ऊर्जा भर दी थी। हाथ उठा कर लोग जवाब दे रहे थे। हम साथ देंगे हाँ हम साथ देंगे।

अगले दिन पार्टी के कार्यालय में टिकटार्थियों की भीड़ सजी थी। कुछ नेता जी की विश्वस्त लोगो के साथ आये थे। कुछ कुछ अपने काम और समाज सेवा की दम पर। अपने क्षेत्र के नामी गिरामी रामसेवक मास्टर का नम्बर आया, बातचीत हुयी, राम सेवक ने अपने सामाजिक कार्यो कुरीतियों के खिलाफ सामाजिक जागरूकता फैलाने के कई कार्यक्रमो के बारे बता क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बतायी। अच्छा ठीक है आप निष्ठावान कार्यकर्ता है, अपना टिकट पक्का समझिये।

देखिये कल पार्टी फण्ड में 3 करोड़ जमा करा दीजिये।..... रामसेवक के पाँव के नीचे की जमीन खिसक गयी। साहब, हमारे काम ही हमारी पूँजी है, पैसा तो हमरे पास है ही नहीं!! हम तो सोचते थे हमारा नाम और काम देखकर पार्टी अपने खर्चे पर चुनाव लड़ाएगी, आपकी भ्रष्टाचार विरोधी बातों से प्रभावित होकर ही तो मैं पार्टी में आया। .... वो ठीक है रामसेवक जी पर देखिये पार्टी बजी तो चलानी है ये कार्यकर्ता जो नारे लगाते है इनका चाय पानी कहाँ दे आयेगा, कल तक जमा करा दीजिये, नहीं तो दूसरा प्रत्याशी घोषित कर दिया जायेगा....
रामसेवक समाज सेवा का, ईमान का बोझ काँधे ओर लादे चल पड़े।
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