कुछ इस तरह की फिर से गाँधी जिन्दा हो उठें

ये नशा शराब का कहाँ था खुशियों का रहा होगा
पुलिस वाले कमबख्त बेवजह चालान काट देते है ।

आओ मनाये नया साल सबके साथ मिलकर के
बेघरों लोगों को खोजकर कम्बल बाट देते है ।

कि कल भी दिखेंगे चौराहो पर खाली पेट बच्चे
अपने निवाले का उनको भी छोटा भाग देते है।

कुछ इस तरह की फिर से गाँधी जिन्दा हो उठें
आओ मिलकर हिन्दोस्तां को एक नया अंदाज़ देते है

@विक्रम

आदमी सा दिखता था

उसे आदत थी
बिल्ला टाँगने की
सॉरी कहने की
थैंक्यू बोलने की 
भारत में अमेरिका जीने की 
जेंटलमैन जैसा दिखने की
बहुत कुछ सीखने की
वो एक मजदूर था
समाज से दूर था
सॉफ्टवेर लिखता था
आदमी सा दिखता था
@vikram

जीवन की रफ़्तार में वो आगे निकल गया

जीवन की रफ़्तार में वो आगे निकल गया
गिरता रहा मगर जो गिरकर सम्हल गया

मंजिल उसी की हो गयी मुकम्मल हुआ जहाँ
जो हौसलो के दरख्तों पर चढ़ता चला गया