गज़ल:उड़ा परिन्दा दर्द में देखों

साख से पत्ता टूट गया है।
आया पतझड़ लूट गया है।

उड़ा परिन्दा दर्द में देखों
बना घोसला टूट गया है।

सहरा में से मिटी लकीरें
याद का मंजर छूट गया है।

दोस्त बनाकर दगा दे गया
प्रेम का धागा टूट गया है।

कुछ लोगों की बात सुनी थी
सच का साहस टूट गया है।

-विक्रम copy rights reserved 

गज़ल:कुछ इन्सान है, कुछ खुदा है लोग ....

मेरे शहर में जमीन से जुदा है लोग
कुछ इन्सान है, कुछ खुदा है लोग।

हम दिल से दिल मिलाने की सोचते रहे
यहाँ मुखौटो की शिल्पकारी पर फ़िदा है लोग।

मौसम की तरह मिजाज बदलते रहते है
कुछ पतझड़ से कटीले है कुछ हवा है लोग।

रोज बड़े होते जाने की कवायद में
खुद ही खुद से भी जुदा है लोग

-विक्रम @copyrights reserved

किसी का थाम लो कॉलर की रंगबाजी का मौसम है (कोठागोई से)...........

प्रख्यात लेखक Prabhat Ranjan जी की "कोठागोई" पढ़ी । मुजफ्फरपुर  के चतुर्भुज स्थान से परिचय हुआ। जिस शहर का नाम अक्सर अपराध की ख़बरों के लिये सुना, सोचा ही नहीं था की उस शहर का अंदाज़ेबयाँ इतना दिलकश भी हो रहा होगा है। वक्त को पीछे खींचकर मुजफ्फरपुर  की उस गलियों में घूमने का मन कर गया, जहाँ सँगीत और कला रचती और बसती रही। जहाँ संगीत का हुनर खुद उस्तादों ने सीखा!!! इतिहास ने चतुर्भुज स्थान को भले जगह ना दी हो पर "कोठागोई" तो सब कह गयी। ...... ये भी तो सच ही है ना हुज़ूर कि सभ्य समाज, अपने शौक और शरीर का बोझ ढोने वाली असभ्य गलियों को भला इतिहास में कैसे अंकित करें????

प्रभात जी के किस्सा कहने का अंदाज़ भा गया, शैली अनूठी है। कहानी की शुरुआत गीतों के साथ करने जा प्रयोग भी काबिले तारीफ है। साथ ही साथ उत्कृष्टकोटि की हिन्दी ने स्वाद जोड़ दिया। एक कहानी पढ़ते-पढ़ते दूसरी पढ़ने की कुहुक उठने लगती है। कानपुर की भाषा शैली का बड़ा प्रभाव दिखा और जिक्र भी, कनपुरिया होने के नाते ये मजेदार था। प्रभात जी को सभ्यता नीव तले दबे हुये कलाकारों की बात आगे बढ़ाने के लिये बधाई। आप सभी "कोठागोई" पढ़े!!!

Technology: Concept of Connectivity, Connected Cars

Recently, Automotive giant Honda launched two car variant in Indian market with terminology " "Connected Cars".  There is buzz about connectivity,
Curiosity about connectivity, Let us have a look on the fact, what is connectivity? Since when we are connected?

Connectivity is there since long time:
Since the concept of Internet of thing(IOT) is materialized. Almost every thing is on the way to connect with Internet directly or indirectly. Though the term connectivity is very subjective. With the time connectivity progressed exponentially. Lets take view of the fact that we are connected since long time, but the way we are connected is evolving very everyday.
  • We are connected since pager was launched, That was passive connectivity via text messages.
  • Since the mobile phone came in existence, we are connected reactively, This also has involvement of real-time data flow i.e voice. Fisrt point is always subset of this.
  • Since the advent of feature rich Android phones, things are connected actively. With the capability to connect other devices having set of generic protocol like Bluetooth Smart, Bluetooth low energy, Wi-Fi, Wi-Fi Direct, NFC, This points to proactive connectivity.
User connectivity and location data was always available since we are connected passively, but it was available only with telecom service provider such as Airtel. Now a days this location specific data is exposed to user by means of technology i.e GPS.  

What is connectivity:
Connectivity about importing or exporting data by some means that can be achieved either by wired or wireless means.  This import/ export of data enables devices to send or receive instruction to perform some activity or take some decision. In context of IOT the mostly devices are connected via, IEEE 802.15.4
i.e. BLE, Zigbee etc. and via cellular medium that is service provider.

What is the Car Connectivity:
Lets talk about some fact which we observe while taking ride on Taxi such as Ola, Uber.

  • Driver can track your location, you can track driver location with the help of Android based application.
  • While driving driver can pick a call and can talk over blue-tooth speaker mounted on dashboard 
  • Taxi bill can be generated, as soon as you finishes trip of driver interrupts to do so. 

This all are the basic features of connected cars. There are some additional features that will add value to term connected cars.

  • Browsing google maps from devices embedded in car i.e. dashboard
  • Observing driving pattern i.e. Tracking speed of car, hard brakes applied, truns taken etc. these features can be tracked using sensor which is backbone of intelligence in car/other devices, Accelerometer, gyroscope, GPS, magneto meter. These features primarily used for usage based insurance(UBI) 
  • Based on driving patterns, sending notification to customer.
  • SOS  feature, which make a call to service centre( Honda cars)  this is parrllle to E-call  feature which is mandatory in Europe.
  • Controlling some of the card functionality via "Android App" i.e Light ON/OFF, addition features can be Car ON/OFF, Music system ON/OFF.
  • Broadcasting location information to set of intended people.
  • Setting alerts if authority is towing your vehicle.
  • Various aspect of vehicle available on-line i.e. Insurance, services details.

In the next articles we will talk about
"Connected Lights", "Connected/Smart Homes", "Connected/Smart Energy meters".

बनारस के घाटों में पण्डे ही पण्डे

बनारस के घाटों में पण्डे ही पण्डे 
मुर्दा जलाने में भी कितने हथकण्डे।

धरम है करम है पर ना कोई शरम है।
दुःखी परिजनों पर भय के है डण्डे।

श्रद्धा के फूलों से कमतर उसूलों से 
सदा है लबालब सदानीरा गंगे।


-Vikram @Copyright Reserved.

ग़ज़ल : मानवता कभी इतनी घबरायी नहीं होती।

फिर दुनिया में तनिक भी बुराई नहीं होती।
जो झूठ की चादर आदमी ने  चढ़ाई नहीं होती ।।

ना होता अपने, बेगाने होते जाने का किस्सा
आसमान में परिन्दों की भी लड़ाई नहीं होती

ना दूसरों के घरों में जो झाँकते फिरते
फिर मुहब्बत की भी कभी रुसवाई नहीं होती।

जो सूरते हाल से अन्दाज़ बयाँ हो जाता
मानवता कभी इतनी घबरायी नहीं होती।

कद अहम् का जो इतना बढ़ाया नहीं जाता
तल्खियाँ रिश्तों में कभी आयी नहीं होती।

-विक्रम @Copyright reserved 

गज़ल: पर कशिश खुद में जगायी है थोड़ी .....

अक्सर अपनी किस्मत आजमायी है थोड़ी
तब दुनियादारी समझ आयी है थोड़ी। 

कुछ तो हालात मुक़र्रर करते रहे है 
पर ताकत मैंने भी लगायी है थोड़ी।

धार के साथ चलना कहाँ मंजूर "विक्रम"
मैंने भी कश्ती चलायी है थोड़ी।

मुहब्बत का मतलब ना जाने ना समझे
पर कशिश खुद में जगायी है थोड़ी।

लोगों ने हमको कहा है दीवाना है
पर आग बदलाव की लगायी है थोड़ी 

-विक्रम @vikram CopyRights Reserved

गरीब का होता कोई कभी ना!!!

बदलूराम वल्द बरसातीराम
खेत खलिहान में करते काम
पर मिलती पगार अधूरी
पण्डित जी भी रखते थे दूरी
बदलूराम ने किया हौसला
शहर जाने का लिया फैसला
शहर में आके ज्ञान बटोरा
सब्जी की लगायी दुकान
कोई यहाँ ना जात पूछता
कोई यहाँ न पात पूछता
छुया छूत का मिटा फासला
बदलूराम का बढ़ा हौंसला

हफ्ता भर बीता था भाई
एक दिन वहाँ कमेटी आई
बदलूराम से माँगे थे पैसे
बदलूबोले भैया क्यों और कैसे?
कमेटी को आया गुस्सा
बदलूराम की करी खिंचाई
सड़क पे तुमने दुकान लगायी!!
जगह क्या तुम्हारे बाप ने दिलायी???
ठेलिया पर मारेगे लात
फैले फिरेंगे तुम्हरे जज्बात!!!
देकर पैसे जान जान छुड़ाई
फिर रोज की तरह करी कमाई

कुछ ही दिन गुजरे PCR आई
पैसे की माँग उठाई
बदलू हो चुका था ज्ञानी
पैसे देकर बना वो दानी

फिर कुछ दिन गुजरे पुलिसवाला आया
पैसा पैसा कान में चिल्लाया
बदलू भैया चक्कर खाये
बोल ही बैठे कल ही तो दिये थे भाई
पुलिस वाले ने हनक दिखायी
साले तीतर से बटेर लड़ा दूँगा
बिना मुकदमें के ही थाने में सड़ा दूँगा
हमको कानून ना सिखाना
नहीं तो वापस घुसा देगें जहाँ से आये हो वही वापस पहुँचा देगे!!
हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट सब धरे रह जाते है
जब हम डण्डे चलाते है।
बबलू की जान हलक तक आई
फिर से दिया रूपया जान छुड़ायी।

अब बदलू में बदलाव है आया
तुरत फुरत देता है पैसे जैसे ही पड़ती
पुलिस प्रशासन की छाया!!!
गाँव शहर की करता है तुलना
सोच रहा है गरीब का होता कोई कभी ना!!
गरीब का होता कोई कभी ना!!!

वो दर्द ओढ़ कर भी मुस्कराता रहा।

हर बार किस्मत को धता बताता रहा
वो दर्द ओढ़ कर भी मुस्कराता रहा।

लोग बताते है,जीवन में उलझने अपार
वो हमेशा सुलझाने का रास्ता दिखाता रहा। 

मैं जंगलो की कवायद का कायल हूँ विक्रम
ना थी धूप, पर पेड़ फिर भी उगाता रहा ।

-विक्रम

कविता: उन्होंने 2009 में 2 BHK बुक करा लिया था

सुना है बहुत विश्लेषण और जद्दोजहद के बाद
उन्होंने 2009 में 2 BHK  बुक करा लिया था 
तब पैसा लगाकर, 
2015  में घर पाने का सौदा बेहद खरा किया था। 
कुछ दिन खुशियाँ अपार, मन के द्वार 
गीत गाती रही है गुनगुनाती रही 
घर का सपना रोज दिखाती रही है 
आशाये थी साथ, घर की थी बात 
हर महीने वो किश्तों देने लगा था
बड़ी खुशी के इंतज़ार में 
अपनी जिन्दगी भी किश्तों में जीने लगा  था। 
२०१5  का वो दिन भी आ गया 
जब बिल्डर की बात सुन निराशा का कोहरा मन में छा गया। 
घर मिलने में देरी थी किनती पता नहीं 
भाई ने इधर-उधर खूब हल्ला मचाया 
पोस्टर उठाये लोगों को जुटाया 
बिल्डर, अखबार, सरकार सब के दरवाजे पर विरोध जताया है 
पर बेहद निराश हुआ जब 
बिल्डर को नेता जी और अधिकारियों के साथ 
नये प्रोजेक्ट का फीता काटता हुआ पाया 
थक गया हार गया 
अब दिन भर शान्ति से चाकरी करता है
अब किश्तें भी चुकाता किराया भी भरता है।
एक दिन एक ज्योतिषी ने बताया था 
की बेटा जो जुआ तू 2009 में खेल कर आया था 
उसी जुआ में  "यादव सिंह " ने खूब पैसा बनाया था। 
उसके अच्छे दिन चल रहे है पर आपका सनी भारी है 
आपके पैसे पर ऐश करता बिल्डर और अधिकारी है 
बाहर से कुछ भी कहे 
पर दिल से आपका आभारी है 
दिल से आपका आभारी है। 



Technology: Images with IR fusion technology

Sometime back us army released video of their army operation in "Syria" showing movement of army personnel and their activities those video and image capturing was based on IR( Infrared) fusion technology.  IR fusion is basically combination of thermal imaging using IR + digital imaging. 

- Thermal imaging is based on fact that every living being, every hot object radiates  Infrared rays( Not visible to human but lies in light spectrum, human body temperature is around 37 to 39 degree Celsius.  
- There are several elements called Pyroelectric element which forms a dipole when exposed to IR radiation and same help in getting thermal images of object or living being.
- Simple physics of Fact that human body radiates IR, is used in various automations, like automatic door opening, escalators operation Security alarms. my sensing proximity or movement. Will post detailed article in  this IR radiation their use in real world in coming post.


This is Thermal Images of Mobile phone, Showing temperature distribution with changing color shown in right side bar.



This thermal image of Iron iron soldering machine used in Lab for solder electronics elements. Temperature is shown in side bar. it as high as 179 *Celsius


Human body thermal images and its temperature distribution shown in side bar and varying color in pics represents same.

आपबीती: पुलिस वाले साहब बोले चोरी नहीं हुआ खोया है, DDR नहीं एप्लीकेशन दीजिये ......

देखिये सोचिये और सोचते रहिये कि ...... बदलाव की बात बस एक चुनावी जुमला ही है। ये जुमला हर पाँच साल में लौटता है, मंचो पर रखें माइक का गला फाड़कर कर  एक बोझिल सी उम्मीद जगाकर चला जाता विधानसभा, संसद भवन सब्सिडी वाला खाना खाने। ......... जिस बात के लिये भूमिका बाँध रहा हूँ उसका जिक्र लाजिमी हो चला है।

आज दिल्ली से लौटते हुये पत्नी का पर्स बस में उड़ा दिया किसी ने। ........ पत्नी ने जानकारी दी मैंने कार्ड इत्यादि ब्लॉक करा दिये। फिर सोचा आतँक के इस युग में पहचान पत्रों का बेजा इस्तेमाल ना हो अतैव प्रथिमिकी(FIR) टाइप का कुछ दर्ज करा थाने में। बस इसी कवायद में पहुँच गये सेक्टर -71 की कोतवाली, जो uflex चौराहे के पास पाँव जमाये खड़ी है ना जाने कब से और खड़ी कर रखी है ना जाने कितनी गाड़ियाँ जिनपर धूल की के चादर बहुत मोटी हो चुकी है। गाड़ियाँ मालिकों के बगैर अनाथ दीख पड़ती थी। खैर मय बेगम हम कोतवाली पहुँचे। ....... एक बन्दूकची ने स्वागत किया। ..... बताईये क्या काम है ? ....... मैडम का पर्स चोरी हो गया। दिल्ली हयात होटल से बस पर बैठ कर ममूरा तक आयी थी। इसी बीच किसी ने हाथ साफ़ कर दिया। ......... खो गया आपका पर्स!!! बन्दूकची पुलिस वाला बोला। ........ मैंने टोका नहीं जी खोया नहीं है चोरी हुआ है।  ....... खोने की ही DDR लिखी जायेगी। वैसे साहब आ रहे उन्ही से बात कर लीजिये।

२-३ मिनट इन्तज़ार करने की बाद एक दूसरा पुलिस वाला आया बाहर सजी मेज और टेबल की ओर रुख था। बन्दूकची ने इशारा किया यही है साहब। ......... हमने साहब से बात करी मामला बताया।  ...... दिल्ली से चढ़ी थी मैडम सो वहां पर भी तो गिर सकती है पर्स .......... खैर पेपर लेकर पर्स खो गयी ये लिख आकर एप्लीकेशन दे दीजिये। ........... मैंने फिर से अपनी बात आगे रखी,  साहब जी पर्स खोयी नहीं है। चोरी हुयी है। .......... साहब  ... अच्छा कब चोरी हुयी?  ........ बेगम ने जवाब दिया ये पता नहीं चला नहीं तो उसी समय ड्राइवर से बोलती। साहब उवाच ........ चोरी का पता नहीं चला मतलब ....... खो गयी!!! आपको क्या चाहिये डॉक्यूमेंट वो मिल जायेगा खोने की DDR से पैसा तो वैसे भी नहीं मिलेगा। अगर डॉक्यूमेंट मिलने कोई दिक्कत आये तो मेरा नाम बता दीजियेगा। ........ साहब ने अपने सीने पर सजी नाम प्लेट आगे करते हुए कहाँ। मैंने फिर गुस्ताखी की ...... सर चोरी के मामले में खोने की रिपोर्ट जँचती नहीं है। आप्लीकेशन क्यों आपको DDR लिखनी चाहिये। साहब ने फिर नाम प्लेट आगे बढ़ाई और कहाँ अरे भाई डॉक्यूमेंट मिलने में दिक्कत नहीं आयेगी आपको मेरा नाम बता दीजियेगा।  ........हालाँकि  ये सच हम सभी जानते है की पर्स, मोबाइल, लैपटॉप इत्यादि खोने की ना FIR लिखी जाती है ना DDR, हाँ एक खर्रे पर हस्ताक्षर करके जरूर मिल जाता है। ये सच मैं हमेशा से जानता था पर फिर भी मैंने अपनी बात आगे रखी। DDR ,FIR ना लिखे जाने का मतलब है किसी तरह की कोई कार्यवाही ना होना !!!! आज से 8 बरस पहले दिल्ली के एक दोस्त पुलिस पोस्ट में भी ऐसा ही हुआ था।    ........  तब मैंने दिल्ली में शिकायत भी की थी और कार्यवाही भी हुयी थी।

खैर साहब को छोड़ हम थाने के एक कमरे में गये, अन्दर की तरफ एक कोने में कंम्बल में लिपटा 12 -13 साल का लड़का बैठा था। बेचारा सा नज़र आता था। दूसरी ओरे जहाँ हम बैठे वहां एक और आदमी सिकुड़ा सा बैठा था। और  एक पुलिसवाला वायरलेस पर अल्फा चार्ली कर रहा था। उनसे एक खर्रा दिया पत्नी ने एपलिकेशन लिखी। पुलिस वाला बोला फोटोकॉपी कर के ले आयो और खुद उठकर चला गया। बन्दूकची दरवाजे पर खड़ा था।  ......... मैंने बन्दूकची से फोटोकॉपी की दुकान की जानकारी चाही ........ बन्दूकची बोला जुगाड़ लगाता हूँ।  जाते जाते बोला अरे इस लडके को देखिएगा कहीं भाग न जाये।  ३०२ का मुकदमा है इसके ऊपर ........ खैर फोटोकपी मिली और हम अपने रस्ते बढे। किसी पुलिस वाले ने एप्लीकेशन देने की एवज में को पैसा नहीं माँगा।

वहां से चलते हुये मैं एहीं सोचा रहा था की कैसा अघोषित सत्य है ये । चोरी को गुमशुदगी बना दिया जाता है और चोर को पकड़ने के प्रयास भी नहीं होते। एक बार को लगा अखिलेश यादव को ट्वीट करू, शहर के SP को ट्वीट करे। ....... फिर सोचा अरे एक पुलिस वाले के शिकायत कर के क्या होने वाला है। वैसे भी पुलिस वालो से बैर ठीक नहीं जी :) ...... जहाँ सारा का सारा पुलिस सिस्टम आज़ादी के पहले वाला चल रहा है वहाँ अकेला चना कहाँ भाड़ फोड़ता है ......... खैर दावों और वादों से अलग पुलिस सिस्टम में सुधार की जरूरत है। ये गृहमंत्री की जिम्मेदारी है। वही जागे तभी कुछ होगा।

किस्मत देखिये, पैदा होते ही मर जाता है।


Sabhaar: wallpapersinbox.blogspot.com
 
बुलबुला अक्सर हमे इन्द्रधनुष दिखाता है 
किस्मत देखिये, पैदा होते ही मर जाता है।

फूलों से चुन-चुन कर आशियाना बनाता है
भौंरा इन्सान को देख घर से उड़ जाता है

सूरज देता है रोशनी, उम्मीदे जगाता है
शाम ढले मायूस सा अपने घर चला जाता है।

सहता है बोझ, ताप और पतझड़ उम्र भर 
पेड़ किसी ना किसी रोज कट ही जाता है।

-विक्रम  @copyRights Reserved



मुद्दा: सोशल मीडिया का जानलेवा रूप

चन्द महीने पहले की बात है, नोयडा की आवासीय सोसाइटी में एक "Paying Guest" का काम चल रहा था। Paying Guest के तौर पर कामकाजी लड़कियाँ रहती थी। जाहिर तौर पर लड़कियाँ टिफ़िन,कपड़े, पानी इत्यादि के लिये बाहर से सेवाएँ ले रही थी । कुछ समय तक ये चला किन्तु कुछ समय बाद लड़कियों ने खाना ख़राब होने का हवाला देकर टिफ़िन वाली सेवाएँ बन्दकर किसी दूसरे टिफ़िन सेन्टर से खाना लेने लगी। इस बात पर पहले वाले टिफीन सेन्टर के लोगो से हल्का फुल्का विवाद हुआ। विवाद के कुछ दिन ही गुजरे थे कि सोसाइटी में कई ग्रुप्स में whatapp पर एक खबर  रही थी कि सोसाइटी में "Paying Guest" के नाम पर "call girls" रह रही है। बिना खबर की जाँच किये सोसाइटी में विरोध हुआ, लड़कियों को शर्मिन्दा होकर घर छोड़ना पड़ा। मामला पुलिस में जाना चाहिये था किन्तु पुलिस के पास जाना भी के बड़ा दुष्कर कार्य है। शायद इसी वजह से लड़कियों ने घर छोड़ना बेहतर समझा होगा। कुल मिलाकर ये वाक्या ये दर्शाता है कि किसी की निजी जिन्दगी, किसी का मान और सम्मान एक गलत मंशा वाले व्यक्ति/महिला के लिये एक बटन प्रेस करने की बात है। सोशल मीडिया बदले की भावना निकलने की यन्त्र बन कर सामने आया है। 

साभार: www.techcrunch.com
आज ही खबर है की मुजफ्फरनगर में एक अधेड़ महिला ने खुदखुशी कर ली। कारण था की साहिब नाम के व्यक्ति ने पहले महिला के साथ बलात्कार किया और उसका विडिओ बनाया। कल अचानक विडिओ wahtsapp पर आ गया। बच्चों, पति रिश्तेदारों तक पहुँच गया। महिला ने जान दे दी। मामला साम्प्रदायिक तनाव को भी जन्म दे सकता है। अब कौन सा कानून उस पीड़ित महिला को न्याय दे सकेगा? कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली है देश की आधी आबादी। ब्लैकमेल इत्यादि। आप हर समय किसी ना किसी कैमरे की जद में है और वो कैमरा ऑनलाइन है। सो किसी का मान सम्मान और अधिकार पल में हवा हो सकते है, होते है। इसकी भरपाई सम्भव नहीं है। सो जरूरी हो चला है की सरकार इन मामलात को बेहद गम्भीरता से ले। कैमरे से फोटो या विडिओ रिकॉर्डिंग शुरू होने पर लम्बी बीप बजने का प्रावधान रखा जाना चाहिये। सो खासकर महिलाओं की सुरक्षा की तरफ एक कदम होगा। whatapp और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर साइबर पुलिस की कड़ी निगरानी का प्रावधान होना चाहिये।

तकनीकि ऐसी चीज है कि उसकी रफ़्तार कभी थमती नहीं, कमोवेश समय की की मानिन्द। तकनीकि बदलाव साथ लाती हैं। बदलाव अच्छे भी और बुरे भी। मोबाइल से बैंक के काम कर लेना, सोशल मीडिया के माध्यम से बैठे-बैठे लोगो के हाल जान लेना एक पहलू है। किन्तु दूसरा पहलू भी है जो बुरा है बहुत बुरा। कोई खबर बिना पुख्ता किये शेयर कर देना, अफवाह फैलाना और किसी की निजी जिन्दगी की बाते एक पल में दुनिया तक पहुँचा देना ये दूसरा पहलू है। विगत वर्ष को देखें तो कई ऐसी घटनाये हुयी जब whatsapp और facebook में शेयर ख़बरों ने पल में साम्प्रदायिक तनाव को जंगल में आग की तरह फैला दिया। कई मामलात में लोगों की जान भी गयी, सार्वजानिक सम्प्पति का नुकसान भी हुआ। जरूरी हो चला है की सख्त कानून और कड़ी निगरानी के साथ देश की आधी  आबादी की सुरक्षा सबसे पहले निश्चित की जाय। अपने लाखों गुणों के बाद भी तकनीकि की एक खामी जानलेवा है। 

मुद्दा: इस्लाम,मालदा, पूर्णिया ..... के साथ खतरनाक स्तर पर लोकतन्त्र

मालदा में मुस्लिमों की 2.5 लाख की भीेड़ आई कुछ गाड़ियाँ कुछ सार्वजानिक सम्पति जला दी, थाने पर हमला किया और उसे जलाकर ख़ाक कर दिया। इसके बाद ऐसी ही एक भीड़ बिहार के पूर्णिया जिले में इकट्ठा हुयी और हिन्सक विरोध किया। इसके पहले भी उत्तरप्रदेश के कई शहरों में भारी भीड़ के साथ हिन्सक प्रदर्शन किया। पुलिस के साथ जोर आजमाईश की। शासन को खुली चुनौती दी गयी?? कहा जाता है की ये सभी हिन्सक प्रदर्शनहिन्दू महासभा के नेता "कमलेश तिवारी" की पैगम्बर मुहम्मद साहब पर आप्पतिजनक टिप्पणी के कारण हुये। "कमलेश तिवारी" ने जब ये टिप्पणी की उसके उपरान्त पुलिस और प्रशासन ने अपना काम करते हुये, उन्हें रासुका के तहत निरुद्ध किया। वो जेल में है। कोई भी हिन्दू संगठन उनके समर्थन में नहीं आया। बावजूद इसके की पुलिस प्रशासन ने अपना काम किया, टिप्पणीकार को किसी भी तरह का कोई समर्थन नहीं मिला। देश भर में हिन्सक प्रदर्शन क्यों?? क्या औचित्य है ऐसे प्रदर्शनों का? 

इसी बीच कोलकाता के एक मदरसे में एक शिक्षक को केवल इसी लिये पिटायी लगायी गयी चूँकि वो बच्चों राष्ट्रगान सिखा रहा था। इसी शिक्षक ने कुछ समय पहले काम उम्र की लड़कियों की शादी का विरोध किया और तब भी उसकी पिटायी की गयी। कई राजनीतिक और सम्वैधानिक पदो पर बैठे लोगो से गुहार भी लगायी किन्तु कार्यवाही का इंतज़ार है। ऐसे ही कई अन्य मामलात है जैसे वन्देमातरम का विरोध इत्यादि। इन घटनाओं में सबसे अधिक चिंता का विषय ये है की दोनों ही मामलात में पुलिस और प्रशासन ने अपना काम सही से नहीं किया। शायद इसे वोट बैंक की राजनीति के चलते इस मामले पर कोई कार्यवाही नहीं हुयी!!! अन्यथा शान्तिपूर्वक प्रदर्शनों के लिये शहर के प्रशासन से इज़ाज़त लेनी होती है। यदि इज़ाज़त लेकर प्रदर्शन किया गया तो जान और माल की सुरक्षा की पुख्ता बन्दोबस्त क्यों नहीं किये गये। दुसरे मामले में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत जिन्हें भारत के सम्विधान ने मान्यता दी है। जो देश की एकता और अखणडता के प्रतीक है। उनका विरोध करना भारत के सम्विधान के विरोध करने के बराबर है। ऐसे मामले में पुलिस ने राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्जकर कार्यवाही क्यों नहीं की।

पुलिस प्रशासन और सरकार की भूमिका सन्दिग्ध है। सरकार अपराधियों को संरक्षण देती नज़र आती है। धर्म की आधार पर कोई कार्यवाही ना करना। ये दुःख का विषय है की भारत के मजबूत लोकतन्त्र का बेजा फायदा उठकर कुछ असामाजिक तत्त्व कानून हाथमें लिये फिरते है। किसी धर्म की पैगम्बर पर कोई टिप्पणी करदे तो देश विद्वेष क्यों झेले?
अखबारों और सोशल मीडिया की खबरों पर गौर करे तो ये कहना मुश्किल नहीं होगा कि इस्लाम में कट्टरपन्थ लगातार बढ़ रहा है। महिलाये क्या करें क्या ना करे, लोग क्या कहे क्या ना कहे हर बात पर जारी होते फतवे ये जाहिर करते है की कट्टरपन्थ बढ़ रहा है। धर्म और धार्मिक कार्य वो होते है जहाँ पर गलतियों से सीख कर लगातार सुधार किया जाये आगे बढ़ा जाये। ना की बाबाआदम के ज़माने की नियम कायदे कानूनों के लिये फतवे जारी किये जाये।

जब एक बालक जन्म लेता है तो क्या अपनी माँ को चुन सकने का अधिकार है उसे? पिता चुन सकने का अधिकार है उसे,धर्म चुन सकने का अधिकार है उसे? जो नियति ने निर्धारित किया वही होता है। उसी तरह लोकतन्त्र में सम्विधान होता है सम्विधान ही धर्म सम्विधान ही कर्म है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत सम्विधान द्वारा प्रद्दत है। इनको चुनने का अधिकार नहीं और विरोध का भी नहीं। चूँकि मामला देश की सम्प्रभुता से जुड़ा है अतैव विरोध ख़ारिज होता है। धर्म के आधार पर इस तरह की स्वतन्त्रता की अपेक्षा रखना बेईमानी है। राष्ट्रधर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं। ये जरूरी हो चला है की मुस्लिम समाज के बुद्धजीवी लोग आगे आये। अपने समाज के लोगो को ये बताये की धर्म देश से बड़ा नहीं सकता। मुस्लिम समाज में महिलाओं की चिन्ताजनक हो चुकी स्थिति और अधिकारों के विषय में सकारत्मक जानकारी आगे बढ़ाये। बहुविवाह प्रथा नारी के अधिकारों का उल्लंघन है। उसे भी बन्द किया जाना चाहिये। समय के साथ सुधार आवश्यक है। जिद और धर्मान्धता अनावश्यक। 

समाज सुधारक राजर्षि छत्रपति साहूजी प्रथम:(1874 -1922)

हिन्दू धर्म की एक खासियत रही है कि स्थापित धार्मिक व्यवस्थाओं को समय-समय पर विभिन्न वर्गों से चिंतको से चुनौतियाँ मिलती रही है और उत्तरोत्तर सुधार भी हुये है। सती प्रथा हो, बालविवाह हो, छुआछूत हो, बहुविवाह रहा हो या कुछ और जागरूक लोगों ने सवाल उठाये और काम भी किया। १९ वी शताब्दी की शुरुआत में ऐसे ही एक समाज सुधारक, सामाजिक चिंतक राजर्षि छत्रपति साहूजी जी ने इतिहास के पन्नों पर बहुत मजबूती के साथ हस्ताक्षर किये, स्वर्णाक्षरों से किये। ऐसे लोगों जिक्र हर समय जरूरी होता है, एक प्रतिनिधि के तौर पर, एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर  अपने  प्रभाव से बाहर निकल कर लोगों की बारे  सोचने वाले लोगों तौर पर , समाज को नयी दिशा देने वालों के तौर पर, एक प्रणेता के तौर पर।  आज जिक्र करते है राजर्षि छत्रपति साहूजी प्रथम का। 

कौन है राजर्षि छत्रपति साहूजी प्रथम:(1874 -1922)
सातारा में छत्रपतियों का प्रभाव समय के साथ कम होता रहा। सत्ता के दो केन्द्र बने पुणे और कोल्हापुर, पुणे में पेशवाओ की ताकत बढ़ी और कोल्हापुर में छत्रपतियों का केन्द्र बन गया। कोल्हापुर में सत्ता हमेशा से छत्रपतियों की चलती रही थी। तब से जब से सातारा से ताराबाई अलग हुयी थी । राजर्षि ने कोल्हापुर में ही "यसवंतराव घटगे" नाम से जन्म लिया और 1884 में दत्तक पुत्र के तौर पर छत्रपति हुये। राजर्षि छत्रपति साहूजी कोल्हापुर के प्रिंसली स्टेट के पहले शासक थे।  princely स्टेट अँग्रेजो की प्रभुत्त्व की देन था। राजर्षि छत्रपति साहूजी उच्च शिक्षित थे और एक सामाजिक चिंतक और सुधारक के तौर पर जाने गये। अपने कार्यकाल में शिक्षा, रोजगार और विकास के कई बेहतरीन कार्य किये। अपने समय में ही राजाराम बाँध का निर्माण भी शुरू कराया जो बाद में किसानों के बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ। 

वेदोक्त विवाद:
१८९४ में सत्तारूढ़ होने बाद छत्रपति एक अजीब विवाद में फँसे जब राजघराने के ब्राह्मण पुजारियों ने गैर ब्राह्मण लोगों का अन्तिम क्रिया कर्म करने से मना कर दिया। उस दौर में छत्रपति ने मुख्य पुजारी को पद्चुय्त कर गैर ब्राह्मण मराठाओं को शिक्षक और पुजारी नियुक्त किया। घोर आलोचनाओं के बाद भी छत्रपति निर्णय से नहीं डिगे। छत्रपति गैर ब्राह्मण आन्दोलन के प्रणेता बने और समाज के दबे कुचले लोगों को सत्ता में जगह देने के साथ साथ मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था भी करायी।

शिक्षा के क्षेत्र में कार्य:

छत्रपति ने अपने कार्यकाल में कोल्हापुर में जगह जगह छात्रावास खुलवाये। शिक्षा को मुफ्त और जातिगत व्यवस्था से मुक्त करने का कदम उठाया। शिक्षित लोगों को रोजगार के बारे सोचा और दिलवाया भी। उन्होंने उस दौर में 1906 में छत्रपति साहूजी जी वीविंग मिल की शुरुआत की 1902 में राजाराम नाम से कॉलेज की स्थापना की। छत्रपति का स्थापित जातिगत व्यवस्थाओं को चुनौती देना उस समय में दुष्कर कार्य था। किन्तु छत्रपति निचले तबके के लोगों को सामान्य अवसर मुहैया करवाये। 
साभार : गूगल

BR अम्बेडर की शिक्षा:  
इत्तेफाक से बाबा साहेब अम्बेडकर की शिक्षा दीक्षा उसी दौर में चल रही थी। शिक्षा हेतु आर्थिक मदद हेतु अम्बेडकर ने छत्रपति को पत्र लिखा और परिणाम स्वरुप छत्रपति ने स्वाभाव के अनुसार मदद की। 

छत्रपति को राज से ज्यादा के सामाजिक चिन्तक और सुधारक के तौर पर जाना गया। मरणोपरान्त भी छत्रपति को हमेशा याद रखा गया। उत्तर प्रदेश की कानपुर विश्वविद्यालय का नाम " छत्रपति साहूजी जी महाराज के नाम पर रखा गया" लखनऊ के प्रसिद्ध KGMC ( Kings Gorge Medical College) को भी छत्रपति के नाम पर रखा गया। खुद कुर्मी क्षत्रिय कुल के होते हुये, उन्होंने दलितों और पिछडो के प्रति जो उदारता दिखायी वो अतुलनीय रही।

1857 की क्रान्ति में पेशवा का योगदान

बाजीराव मस्तानी के साथ आजकल इतिहास चर्चा में है। इतिहास में झाँके गौर से देखे तो पेशवाई छत्रपतियों के अधीन रही। छत्रपति शिवाजी, सम्भाजी, राजाराम, ताराबाई और फिर शिवाजी के बाद महानतम छत्रपति साहूजी जी महाराज। पेशवाई पहले पहल वंशानुगत ना थी किन्तु बाजीराव की अदभुत युद्ध शैली और प्रभाव के चलते साथ ही साथ साहूजी पर उनके विश्वास ने पेशवाई को वंशानुगत बना दिया। पेशवा बदलते रहे और साथ साथ सत्ता का केन्द्र सातारा से बदलकर पुणे हो गया। मतलब सत्ता छत्रपतियों से पेशवाओं की तरफ चली गयी। अँग्रेजो के बढ़ती ताकत ने पेशवाई को समय के साथ-साथ पुणे से कानपुर भेज दिया । दरअसल विस्थापित होना पड़ा। कानपुर इस लिये भेजे गये क्यों की कानपुर में अँग्रेजो की बड़ी सैनिक छावनी थी। वहाँ से बस नाम के पेशवा रह गये बाजीराव द्वितीय पर नियन्त्रण और नज़र रखना दोनों आसान था। सो कुछ रिश्तेदारों और 15000 लोगों के साथ पेशवा अँग्रेजो की पेन्शन पर 1818 में कानपुर के बिठूर में विस्थापित हुये और 1851 में बाजीराव द्वितीय परलोक सिधार गए।मणिकर्णिका ताम्बे उर्फ़ रानी झाँसी लक्ष्मी बाई जी बाजीराव के दरबार में ही पली और बड़ी हुयी।

1857 की क्रान्ति में पेशवा का योगदान
1851 में बाजीराव द्वितीय की दत्तक पुत्र नाना साहब द्वितीय (धुंधूपंत) पेशवा बने । पेन्शनअफ्ता पेशवा। पेशवा को कभी पुणे की पेशवाई की गद्दी में बैठने का सौभाग्य प्राप्त ना हुआ। 1851 से 1857 तक पेशवा रहने वाले धुंधूपंत 1857 में बेहद महत्वपूर्ण हो गये। कानपुर में अँग्रेजो की सैनिक छावनी थी और गढ़ भी। 1857 की क्रांति के दौरान कानपुर के कलेक्टर नानासाहब से सहयोग की उम्मीद लगाये थे। किन्तु सैनिकों की बगावत के बाद नानासाहब ने कम्पनी से युद्ध का एलान कर कानपुर के उत्तरी हिस्से में स्थित "Magazine"को घेर लिया। और कब्जे के उपरांत बहादुर शाह के समर्थन का ऐलान कर दिया। कानपुर को जीत मराठा पेशवाई की परम्परा को जीवित करने की घोषणा की। अँग्रेजो के विरुद्ध सैनिक को इकठ्ठा किया। कानपुर छावनी को 6 जून से २४ जून १८५७ तक घेरे रखा।

सतीचौरा काण्ड:
ऐसी भ्रान्तियाँ व्याप्त थी की अंग्रेजी छावनी में बारूदी सुरंग बानी है जो हमले से फट जाएगी इसी लिये छावनी के अंदर किसी ने प्रवेश ना किया।  २७ जून को एक समझौते के तहत बड़े अंग्रेज अधिकारियों को निकलने का रास्ता दिया गया किन्तु गंगा में नावों पर बैठते ही। अँगेजो पर हमला हुआ और बहुत अँगेज मारे गये। नानासाहेब ने इस हत्याकाण्ड की इज़ाज़त नहीं थी। ये लोकल लोगों के गुस्से के परिणाम स्वरुप हुआ। सैकड़ो अँग्रेज सतीचौरा घाटपर मार दिये गये। बीवी और बच्चों को कैद कर लिया गया। कैदकर बीवीघर में रखा गया।

बीवीघर हत्याकाण्ड:
15 जुलाई 57 को बीवीघर में कैद औरतो और बच्चों के आवाज़ में अँग्रेजो से सौदा करने का इरादा था। इलाहाबद से जनरल हैवलॉक के साथ सेना कानपुर बचाने के लिये बढ़ रही थी। नानासाहेब को जब खबर लगी उन्होंने सेना की एक टुकड़ी भेजी।   फतेहपुर में मुकाबला हुआ अँग्रेज विजयी हुये। नानासाहेब ने भाई बालाराव के नेतृत्व में दुबारा सेना भेजी  औंग में मुकाबला हुआ और बालाजी की हार हुयी। नानासाहेब अहीरवा गाँव के पास मोर्चा खोला।  किन्तु बीवीघर में जघन्य हत्यकांड हुआ।  अंग्रेजो के बीवी बच्चों को गोलियों से  भून दिया गया बच्चों को भी क़त्ल किया गया। कहते है की हत्या के आदेश हुसैनी बेगम ने दिये थे। अहीरवा में नानासाहेब पराजित हुये और समय रहते वहां से निकल आये।

नाना साहेब की रहस्यमयी गुमशुदगी :
अहीरवा में हार के बाद, 16 जुलाई को नानासाहेब को ने अँग्रेजो की छावनी को जलाकर नष्ट कर दिया। नानासाहेब समय रहते कानपुर छोड़ दिया अंग्रेज उन्हें कभी नहीं पकड़ सके हालाँकि उनकी तलवार अंग्रेजो के कब्जे में आ गयी। कहा जाता है की नाना साहेब नेपाल चले गये और उनका परिवार भी वहीं पर रहा। बीवीघर और सतीचौरा काण्ड के चलते अँग्रेजो की नानासाहेब की बहुत खोजबीन किन्तु नानासाहेब रहस्य बन गये। और आज तक रहस्य ही है।