कलाम साहब अमर हो गये!!!

जैसे कुछ खो सा गया हो, मानो कोई अपना बहुत दूर चला गया हो, ऐसा एहसास दिल में घर कर गया है। कल उनके चले जाने की खबर पर यकीन नहीं हुआ। इधर-उधर ऑनलाइन अखबारों में बेसब्री के साथ झाँक कर देखा, तब आँखों के रस्ते दर्द दिल में उतर गया। काल की क्रूरता आभास हुआ, युगपुरुष चले गए!! डॉ कलाम साहब का चले जाना किसी परिजन के चले जाने जैसा दर्द देकर गया है। ऑनलाइन सामाजिक मंचों, दफ्तर के सहकर्मियों सभी में इसी तरह का दुःख देखा। देश का हर दिल शोकाकुल है। देश के हर घर में उनके सद्गुणों की चर्चा है। ये तथ्य एक व्यक्ति के व्यक्तित्व की गवाही देते है। महान वैज्ञानिक, निःस्वार्थ समाजसेवी, असाधारण नेता, एक साहसी व्यक्ति सारे देश को दुखी कर चला गया। डॉ साहब की सादगी और उनका पूरा जीवन देश को समर्पित रहा। ऐसा समर्पण,ऐसी सादगी देश के उन नेताओं में ही थी जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई लड़ी। गाँधी जी, वल्लभभाई पटेल, शास्त्री जी, लोकनायक जयप्रकाश की श्रेणी का एक और व्यक्ति कल चला गया। सोचता हूँ की जब दशकों पहले जब शास्त्री जी चले गये थे, तब देश बिलकुल यही होगा। अपार दुःख की एक घड़ी में कलाम साहब के जीवन से जुड़े कुछ पहलू है जिनका जिक्र लाजिमी हो चला है।
साभार :गूगल इमेजेज

डॉ कलाम के हस्तक्षारों से जन्मी नयी ऊर्जा !!
सन 2002 में इंजीनियरिंग के दिनों में मेरे एक सीनियर थे "जयप्रकश कुशवाहा सर" उन्हें स्केच बनाने का शौक था। अमूमन माधुरी  प्रीति जिन्टा टाइप हिरोइनो के स्केच बना कर खुश हो जाने वाले जयप्रकाश सर को एक दिन ना जाने क्या सूक्षी उन्होंने डॉ कलाम का स्केच बनाने की ठानी, बना भी लिया और डॉ साहब का एड्रेस जुगाड़ कर उनको ये स्केच भेज दिया। उन दिनों डॉक्टर साहब राष्ट्रपति हुआ करते थे। भेजकर हम दोनों इस बात को भूल गये। करीब 20 -25 दिन के बाद जयप्रकश सर एक बेहद उत्साहित और उमंग से भरे मेरे कमरे में आये और बोले यार आज बड़ा दिन है।  तू देखेगा तो यकीन नहीं करेगा!! डॉ कलाम ने उस स्केच को अपने पास रख लिया और मुझे उसी की फोटोकॉपी पर साइन करके भेजा है। ये देख अपनी हाई स्कूल की मार्कशीट से भी ज्यादा नजाकत से उस कॉपी को पकड़े जयप्रकश सर एक सपने के पूरे हो जाने  ख़ुशी में डूबे नज़र आये। मैंने जयप्रकश को बधाई दी और इस बात को आगे प्राचार्य सत्यशील जी तक ले जाने का अनुरोध किया। प्राचार्य सत्यशील इस तस्वीर को देखकर जयप्रकश सर की कला के मुरीद हो गया। प्राचार्य ने इस काम को आगे कॉलेज स्तर तक बढ़ाने और ऐसे ही कई कलाकारों को खोज निकलने का अनुरोध किया। बाद में हमने कॉलेज में एक "कला बीथिका" का आयोजन किया। अमूमन इस तरह के कार्यक्रम इंजीनियरिंग कॉलेज में होने का कोई इतिहास नहीं था। किन्तु हमारे पास डॉ कलाम शाइन वाली तस्वीर थी। हर निराशा के क्षण में एक नयी ऊर्जा देने में सक्षम। हमने डॉ साहब की शाइन वाली तस्वीर के साथ गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज और गीडा के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज सभी को निमन्त्रण दिया। कला बीथिका का आयोजन बेहद सफल रहा । बड़ी बात ये थी कि बेहद ही मितव्ययी प्राचार्य नाम जाने वाले प्राचार्य सत्यशील शुक्ल जी ने कार्यक्रम का पूरा फण्ड कॉलेज की तरफ से उपलब्ध कराया। इस तस्वीर को गोरखपुर के कुछ अखबारों ने भी प्रकाशित किया था।

लखनऊ की युवती को न्याय दिलाया। 
जब डॉ साहब राष्ट्रपति थे उन दिनों डॉ साहब का लखनऊ के पास एक कार्यक्रम था। कार्यक्रम के दौरान एक युवती सुरक्षा घेरे जो तोड़कर घुस गयी। सुरक्षाकर्मियों ने आगे जाकर युवती को धर लिया तब डॉक्टर साहब ने हस्तक्षेप कर उस युवती को बुलाया उसकी बात सुनी। युवती के पिता की जमीन पर कुछ दबंगो कब्ज़ा कर लिया था। जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस का रुख वैसा ही जैसा हमेशा होता है था। कलाम साहब ने  लेकर मुख्यमंत्री की सामने गम्भीर चिन्ता जाहिर की, अगले दिन की अखबार कह रहे थे की FIR दर्ज हो गयी और गिरफ्तारियाँ भी हुयी। ये सब होने के कई महीने बाद अखबार में जब ये खबर छपी की राष्ट्रपति महोदय ने राज्यपाल माध्यम से उस युवती की केस की ताजा जानकारी हासिल की और जरूरी कार्यवाही  निगरानी करने का अनुरोध किया, तो सुखद आश्चर्य हुआ, लगा जैसे इंसानियत आज भी जिन्दा है।
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