Deplorable PG Portal(http://pgportal.gov.in), ignorant authoritieshttp://pgportal.gov.in


Status as on 31 Jan 2014 
Point to note here after two year  University grant commission closed request by providing reason:
Now the Grievance is outdated, action must have already been taken by the concerned organization.
  


RTI-2005; What, how and whom


What is information in context of RTI-2005
Information means any material in any form including records, documents, memos, e-mails, opinions, advices, press releases, circulars, orders, logbooks, contracts, reports, papers, samples, models, data material held in any electronic form and information relating to any private body which can be accessed by a public authority under any other law for the time being in force

"कट्टर सोच नहीं युवा जोश" के साथ चौराहे पर चिपका ४५ साल का युवा !!!

किसी को युवा किस आयु तक कहा जा सकता है? सवाल दीगर है, युवावस्था कब तक?? ये सवाल आज कल मेरे जहन में लगातार घुमड़ रहा है। निरंतर, अविरत. कोशिश जारी है कि युवावस्था और युवा कि सरल परिभाषा खोज सकूँ।
IT park Chandigarh

RTI Act-2005 FAQ( Frequently asked quetions)

When RTI application received though APIO, what is time limit to provide information.
1. 45 days
2. 35 days
3. 55 days
4. 25 days

RTI: MPLADS funds utilization Status; MP Salmaan Khurseed, Parliamentary seat: Farrukhabad

RTI-2005 Application with "Ministry of Parliamentary affairs" which in course of information transferred to "Ministry of Statistics and Programme Implementation."
Registration Number: 11011/197/2013-RTI(MPLADS) Date: 10.01.2014

RTI: Why "Robert Vadra" is exempted from security checks at Airports??

RTI with Ministry of Civil Aviation Indian Government.
RTI registration  Number:  MOCAV/R/2013/60325 Vide letter No. AV.13024/1/2013-AS
Explore More about RTI-2005 -
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RTI of Neta Ji Subhash Chandra Bose
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Documents required for passport of baby


Documents required for passport of baby
1.    1 photo 3.5 * 4.5 White backgrounds, eyes open, with-out cap.
2.    Birth certificate; Issued by competent authority. i.e. Registrar of Birth and Death( Municipal Corporation officer, Village development officer, Municipal committee registrar)   
3.    Passport of both parents is required if already have the passport.
    Otherwise, acknowledgement receipt for already applied passport also works.
4.    Passport of parents shall have spouse name endorsed, if not marriage certificate is required.










5.    Passport of parents shall have address of location for which they are giving address proof, else have a proof which substantiates you are living at that address for more than a year. Father and mother both shall have one proof of address on their name.
6.    Annexure H if it’s under normal; This need to be signed by both parents.
7.    For tatkal one need to submit Annexure H + Annexure F + Annexure I.

List of banned Organisations in India: As per ministry of Home Affiars

Banned Organizations:
LIST OF BANNED TERRORIST ORGANISATIONS UNDER SECTION 35 OF UNLAWFUL ACTIVITIES (PREVENTION) ACT, 1967
S.No Organisation
1 Babbar Khalsa International
2 Khalistan Commando Force
3 Revolutionary People's Front (RPF) in Manipur
4 International Sikh Youth Federation
5 Lashkar-e-Taiba/Pasban-e-Ahle Hadis
6 Jaish-e-Mohammad/Tahrik-e-Furqan
7 Harkat-ul-Mujahideen/Harkat-ul-Ansar/Harkat-ul-Jehad-e-Islami
8 Hizb-ul-Mujahideen/ Hizb-ul-Mujahideen Pir Panjal Regiment
9 Al-Umar-Mujahideen
10 Jammu and Kashmir Islamic Front
11 United Liberation Front of Assam (ULFA)
12 National Democratic Front of Bodoland (NDFB)
13 People’s Liberation Army (PLA)
14 United National Liberation Front (UNLF)
15 People’s Revolutionary Party of Kangleipak (PREPAK)
16 Kangleipak Communist Party (KCP)
17 Kanglei Yaol Kanba Lup (KYKL)
18 Manipur People’s Liberation Front (MPLF)
19 All Tripura Tiger Force
20 National Liberation Front of Tripura
21 Liberation Tigers of Tamil Eelam (LTTE)
22 Students Islamic Movement of India
23 Deendar Anjuman
24 Communist Party of India (Marxist-Leninist) -- People’s War, All its formations and front organizations
25 Maoist Communist Centre (MCC), All its formations and Front Organisations
26 Al Badr
27 Jamiat-ul-Mujahideen
28 Al-Qaida
29 Dukhtaran-e-Millat (DEM)
30 Tamil Nadu Liberation Army (TNLA)
31 Tamil National Retrieval Troops (TNRT)
32 Akhil Bharat Nepali Ekta Samaj (ABNES)
33 Hynniewtrep National Liberation Counsel (HNLC)
34 Achik National Liberation Counsel (ANVC) in Meghalaya
35 Garo National Liberation Army (GNLA), all its formations and front organisations
36 Indian Mujahideen and all its formations and front organisations

RTI to MEA: Indian relation with Pakistan post fifth anniversary of 26/11

A one and half month back, India marked the fifth anniversary of terror attack 26/11 in Mumbai.The financial capital of India was assaulted by proxy war against humanity by our neighbors. The gruesome attack which sent shock waves across the world. Often, I think of how we tackled this case in last 5 years? What all are the progress made? Have we made any arrangement to avoid iteration of such incident ? Have we considered any precautionary measure to avoid such crime against humanity? This time, I thought of collecting relevant information on proceedings, which are on

एक भारत ऐसा भी है। जहाँ कोई मूलभूत सुविधा तक मुहैया नहीं होती है!!!!!

एक भारत ऐसा भी है। जहाँ  ना कोई मूलभूत सुविधा तक मुहैया होती है।  ना ही कोई सामाजिक सुरक्षा। ना ही कोई शिक्षा।  इनकेहितों  हितो  की खोज खबर ना ही सरकार को है न को। गौरतलब है की ये दैनिक वेतनभोगी मजदूर है। जो रोजगार  की तलाश में अपना गॉव छोड़ शहर की तरफ आये है।शहर बदलते-बदलते कई बार प्रदेश भी बदल जाया करते है। सो अन्तत: जहाँ ये रहते है वहाँ न इनका मतदाता पहचान पत्र होता है न ही राशन कार्ड। सो सरकारी सुविधा से पूर्णतया महरूम। परिणाम स्वरुप इनके बच्चे जिनकी सँख्या मूलतया ज्यादा ही होती है सर्व शिक्षा अभियान का हिस्सा भी नहीं बन पाते  है। ये उस भारत में निवास करते है जहाँ इनका कोई रिकॉर्ड भी सरकारी तंत्र के पास नहीं हुआ करता। किसी दुर्घटना की  स्थिति में परिवार के लोगो तक का  तक लगा पाना एक कठिन काम हो जाता है।  ये वो वर्ग है जो रोज रोजगार कि तलाश में शहर के दैनिक वेतनभोगी मजदूरों की  मण्डी में रोज सुबह जाकर खड़े हो जाते है।  मौसम कोई भी हो इन्हे जाना ही होता है। इनके लिए कोई शेल्टर होम नहीं होता इनके लिए धूप या पानी में खड़े होने कि कोई  करती। रोज किसी रोजगार देने वालें से है। बात बनी तो ठीक नहीं तो मोलभाव का एक दौर चलता है। बाजार भाव में बात नहीं बनी तो मजबूरीवश बाजार भाव से नीचे काम करने के लिए तैयार हो जाते है। अमूमन इनका दैनिक भत्ता निश्चित नहीं हुआ करता।  कानून भले बने हो पर व्यवहारिकता में उनका अस्तित्व नहीं है। ऊचे भवन बनाते है पर खुद के लिया जमीन नहीं !!!!
A panorama View of construction at Zirakpur- A suburb of Chandigrah


मेरे देश में लोकतंत्र नहीं कांग्रेस-तंत्र चलता है।


बीते साल कुछ मान्यताये, कुछ दावे, कुछ अधिकार सब हुये शर्मसार। एक तरफ माननीय उच्चतम न्यायलय के आदेश से "कैम्पा-कोला सहकारी समिति" में अवैध निर्माण गिराने के आदेश जारी हुए और दूसरी ओर जारी हुआ एक  संघर्ष अपना एक अदद घर बचाने का। गौरतलब है कि ये वो आम लोग थे जिनको एक बिल्डर और सरकारी तंत्र की मिली भगत से ठगा गया था। २५ वर्ष से अधिक की लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद घर भी नहीं बचा। में  लोगो ने हर सम्भव प्रयास किये घर बचाने के पर दमन हुआ। लोगो कि नज़ारे मुख्य-मंत्री आवास की ओर टिक गयी। पर मुख्य-मंत्री जी कहना था कि यदि वो "कैम्पा-कोला सहकारी समिति" के लोगो का घर बचाने का प्रयास करते है तो इससे लोगो में एक गलत सन्देश जायेगा और एक गलत परम्परा कि शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री साहब यहाँ पर तर्कसंगत थे। किन्तु यही मुख्यमंत्री विरोधाभासी हो गए तब जब "आदर्श सहकारी समिति" में हुए पार्टी के बड़े हेर फेर की रिपोर्ट आयी। मुख्यमंत्री अपनी समूची कैबिनेट के साथ ये कहते सुने गए कि रिपोर्ट में दम नहीं है।  और हम इस जाँच को ख़ारिज करते है।  कोई तर्क नहीं "पाटिल जाँच आयोग" की वर्षों की मेहनत एक पल में ख़ारिज कर दी गयी।  
"कौन कहता है कि देश में लोकतंत्र है? कौन कहता है की कानून कि नज़रों में सब बराबर है? कौन कहता है की कि ख़ास को वरीयता नहीं मिलती?
जहाँ एक ओर "पाटिल जाँच आयोग" की रिपोर्ट खारिज मुख्यमंत्री जी कुछ दूर चले ही थे की बड़ी राजनैतिक के बड़े नेता ने एक चिंता जाहिर की। और मुख्यमंत्री साहब झुक गये तत्पश्चात कुछ अपराधी छोड़ दिए गये और कुछ को बलि का बकरा बना दिया गया। छोड़े वो गये जो बेहद ख़ास है ऊचे पदों पर है। कांग्रेस के चहेते है। सो हुआ ना कांग्रेस तंत्र !!!!! सो सारांश ये हुआ की -
फिर से कानून को तोडा गया मरोड़ा गया, 
कुछ को पकड़ा गया और कुछ को छोड़ा गया,
फिर से एक बार बाजार सजी,
फिर से एक बार लोकतंत्र नीलाम हुआ,
फिर से एक बार तमाशा सरेआम हुआ।
कैम्पा कोला सोसाइटी रेजिडेंट  साभार :http://www.financialexpress.com
 आदर्श घोटाले के कुछ बड़े सच :
- कारगिल के हीरो के नाम पर  हुयी धोकधडी
- सेना प्रमुख ने आय गलत बतायी : दीपक कपूर साहब ने अपनी आय गलत बतायी।
- चपरासी के नाम पर फ्लैट। कर्ज ५९ लाख लिया पगार मात्र ९००० रुपये मासिक ??
-  अशोक चव्हाण  की पत्नी कि भाभी, सास, ससुर को फ्लैट मिले।
-  नगर निगम कमिश्नर "जयराज पाठक " को नियम तोड़ने मरोड़ने के लिये पुरष्कार मिला एक अदद फ्लैट।
- प्रदीप व्यास "डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर" २००२ से २००५ को कि पत्नी को फ्लैट मिला।
- देवयानी खोबरागड़े को आवास मिला।  ये जग जाहिर है की इनके पिता देश के गृहमंत्री के बेहद ख़ास है।
- नियम बदले गये भवन की फ्लैट्स कि सँख्या में इजाफा किया गया।

सजा किसे मिली ??? उन लोगो को जो कैम्पा कोला में रहते थे।  ठगे  गए थे ??  और जो ठगने वाले थे कैम्पा कोला हो या आदर्श वो बच गये।  कानून की ऑखों में पट्टी है। कब खुलेगी पता नहीं पर!!!

नव वर्ष पर मंगल कामनायें करे,संकल्प ले की जो भी कार्य करेगे सृजनात्मक करेगे उन्मादी नहीं !!!

नववर्ष की संध्या पर मंगल कामनायों सभी की  होती है।  कि नव-वर्ष हर्ष और उल्लास के साथ आये और ये हर्ष और उल्लास अगले आने वाले वर्ष तक कायम रहे।  पर ये कामना किस तरीके से की जाय ये चर्चा का विषय हो सकता है। सभी के विचार अलग -अलग हो सकते है किन्तु कुछ समानताये भी अवश्यसंभावी है। जैसे नववर्ष को मानते हुए अति उत्साही ना हो। सकारात्मक भाव में यूँ  भी कह सकते है कि जश्न मनाने का अंदाज़ कुछ भी हो पर शांतिपूर्ण होना चाहिए। जश्न ना खुद को नुकसान-देय हो ना किसी और को. प्रसंगवश जिक्र लाजिमी है  . कि जश्न का अतिउन्मादी होना आत्मघाती हो सकता है। जश्न मनाने वाले कई बार बड़े सृजनात्मक( जश्न मनाने वाले के परिप्रेक्ष में ) तरीके निकाल लेते है। चंडीगढ़  के पास ज़ीरकपुर इस्थित राष्ट्रीय-राजमार्ग-२१ , शिमला कि ओर ले जाने वाले राष्ट्रीय-राजमार्ग-२२ के कुछ उपरगामी पुलो रात्रि के समय नजारा कई बार बेहद चौकाने वाला होता  है. देर रात्रि अंतिम लेन पर कुछ कारे खड़ी हुई संख्या तीन  से चार के बीच होती है।  १२-१३ युवक-युवतिया तेज आवाज़ संगीत पर थिरक रहे होते है।  हाथों में सिगरेट और जाम जश्न का माहौल बनाने के लिये जोर-जोर से संगीत को दोहराया जा रहा होता है। और बगल से गुजरती हुई तेज रफ़्तार गाड़ियाँ। ये दृश्य कमोबेश रोज देखे जान सकते है। ये तरीका जो शायद काफी समय से चलन में है किन्तु असुरक्षित, सम्भव है कि ये साहसिक कार्य लगे किन्तु ये कानून का उलंघन है। ये काम किसी भी बार में हो सकते है। किसी सुनसान पार्क में भी हो सकते है किन्तु राष्ट्रीय-राजमार्ग जैसे खतरनाक। जगह पर ऐसा क्या है जो उन्माद पैदा करता है?
ये सवाल दीगर है पर जवाब नहीं मिल पाया।  क्यों कि यह मान लेना सुआप रक्षित है बहुतायत युवक और युवतिया साधारण परिवारों से होते है। ये सब भी अपने माँ और बाप ये अच्छे बच्चे होते है। सो क्या मनः स्थिति होती है जो इस तरह के दुःसहसहिक कार्य करते है।  विषय पर विचार करके बस एक ही ख्याल दिल में आया। 
जब बचपन में जब फ़िल्म या कोई धारावाहिक देखता था तो पिताजी इसके लिए सशर्त इजाजत दिया करते थे। मुख्य शर्त ये होती थी कि फ़िल्म देख कर "क्या सीख मिली!!" ये फ़िल्म के उपरान्त बताना होगा। बचपन में शायद फिल्मे में अर्थ होता था या बालमन कोई न कोई सीख खोज निकलता था जो उदहारण स्वरुप पिताजी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी हुआ करती थी। किन्तु आज जब पहले  कहीं ज्यादा शिक्षित और अनुभवी हूँ तब मैं कुछ सीख पाने में अक्षम पाता हूँ। उदहारणस्वरुप धूम -३ नामक फ़िल्म देखने के उपरान्त मैं इस विषय पर शोधरत रहा कि मैं इससे क्या सीखा सकता हूँ।  सर्कस कि कलाबजिया .... या फिर बाइक के स्टंट या किसी को बर्बाद करने का करिश्माई तरीका भाई -२ का प्यार या फिर बदले कि भावना??? कहते है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और इस दर्पण को देख कर ही मानसपटल पर कई प्रभाव छूट जाया करते है। ख़ासकर यदि  युवा पीड़ी के मामले में बेहद तर्क-संगत है।

राष्ट्रीय-राजमार्ग -२१ , २२ और ऐसे ही कई और स्थानो पर जो होता है क्या यही उसके लिए जिम्मेदार नहीं है  ?????? धूम -३ , शुद्ध देसी रोमांस। ………