सड़क गर्मी या सर्दी के मौसम में बनती है और हर बारिश में टूट जाती है।

<<<सत्य की लड़ाई में कुर्बान हुए "सत्येन्द्र दुबे" जी को समर्पित  कुछ पंक्तियाँ >>>
 
सड़क गर्मी या सर्दी के मौसम में बनती है, पर हर बारिश में टूट जाती है।
जब-जब ऐसा होता है, तब-तब मुझे "सत्येन्द्र दुबे " की बड़ी याद आती है।।

दुबेजी ने ऐसे ही बारिश के मौसम को सोच कर अपनी आवाज उठाई थी।  
पर अफ़सोस की उनकी हत्या की सजा कुछ भोर के लुटेरों ने पाई थी।।
 
यकीन नहीं आता की देश में कानून और व्यवस्था कल अच्छी थी या आज अच्छी है।
पर दुबे जी के बलिदान को हर तरह ठुकराया गया ये बात पूरी तरह सच्ची है।।

अब कोई और आवाज उठाये भी तो कैसे, खबर लीक हो जाती है ऐसे हो या वैसे।
सुनी जाती है उसकी बात जिसके पास या तो पद तो या तो पैसे।।

टूटी सड़क को देख आवाज उठाने की बात मन में आती है, तो मेरी आत्मा सिहर जाती है।
क्यों की आज भी हर तरफ सड़क पर "सत्येन्द्र दुबे" की आत्मा तड़पती नज़र आती है।।