है प्रेम-कबूतर थाने में...

बरपा कहर ज़माने में
है प्रेम-कबूतर थाने में

लईका बिटिया इश्क़ लड़ाये
लगे माई बाप लगा कमाने में

इश्क का बाजार लुट गया
था अरसा लगा पटाने में

बन मुर्गा मशहूर हो गया
शहर भरे दीवानों में

बैठ पार्क, फरहाद बना
वही लगा रिरियाने में

प्रेम पपीहा मुँह बायें था
छलकी मदिरा पैमाने से

यादव जी सस्पेंड हो गये
बस अपनी बात बताने में

भैया भाभी दोवु नप गये
मुर्ग मुसल्लम खाने में

एन्टी रोमियो वर्सेज एन्टी ठर्की

रोमियो, यूँ तो सेक्सपियर के उपन्यास का नायक था, पर भारत में है "एक तरफ़ा प्रेम कबूतर" भी कहते है। खैर अब तो थप्पड़ थेरेपी चल रही है ससुरऊ की थाने में, पुलिस और में बाप दोनों ने गत करी।

एन्टी ठर्की ऑपरेशन कब चलेगा भैया? संसद से जुम्मा-जुम्मा 2 किलोमीटर की दूरी पर ठरक पन शबाब पर है?कानूनी शब्दो में एंटी जिस्मफरोसी ऑपरेशन भी कह लीजिये। GB रोड वाला ठरकपना!!! ऑपरेशन कब शुरू होगा? माना कि उनका वोट बैंक ज्यादा नहीं पर है तो भारतीय नारी ही, चलो कुछ तौ करो, सनी लियॉन टाइप पुनर्ववासित भी।

ये कैसी शर्माने लगी सैफई देखो ....

नेता वोट लेकर चला गया भाई
वोटर खड़ा झुनझुना हिलाता है ।

ये कैसी शर्माने लगी सैफई देखो
जैसे कोई सलमान घूँघट उठाता है

लुट गया डेमोक्रेसी का हस्तिनापुर
द्रौपदी सा खड़ा कोई मुस्कराता है।

खुमार कभी उतरता नहीं देखो
देशभक्ति का हुक्का गुड़गुड़ाता है ।

@विक्रम

तुम आदमी नहीं...

तुम आदमी नहीं
इंसानियत की जिन्दा लाश हो
हाड़ के ढाँचे में
गुथा हुआ मास हो
ये तुम्हारा घर इंसानियत की कब्र है
ये तुम्हारा स्पन्दन करता यकृत
खोपड़ी की गुथम्म-गुत्था
साजिशो का साज है
@विक्रम

मुट्ठी भर ही सही हौसला बचाये रख......

जिगर है चाक, ना सी, बस देखता रह
गिलास में शराब, ना पी बस देखता रह

बहुत भीड़ है और शोर शराबा भी है
उन्माद की तासीर है, बस देखता रह

कई अभिनय अदाकारियाँ चलते रहेंगे
तामझाम है शहर का बस देखता रह

ये डर ये कैद ये सलीब सब किसके है
शोर है नये निजाम का बस देखता रह

मुट्ठी भर ही सही हौसला बचाये रख
कि होते है करिश्मे भी बस देखता रह

@विक्रम

भौरा-भौरा गुँजन करता...

जीवन अपना,
रंग-बिरंगे फूलों जैसी पाती है
भौरा-भौरा गुँजन करता,
तितली-तितली गाती है

रात चरागों की बारातें
झिलमिल-झिलमिल आती है
दिन आता है सुबह लेकर
आस कभी न जाती  है।

एक शेर : कोख किराये पर है, आबरू चौराहे पर है,

कोख किराये पर है, आबरू चौराहे पर है,
और हम है कि नारी दिवस मनाये जाते है।
@विक्रम

जिन्दगी लीज पर है, फ्रीहोल्ड थोड़ी है...

अमा कैसी नफ़रतें,कैसी अदाकारियाँ
जिन्दगी लीज पर है, फ्रीहोल्ड थोड़ी है।

सियासी लिबास पहने आया है मजहब
अपने भी उसूल है, झाड़ का पेड़ थोड़ी है।

ना जमीं, ना दौलत का शौक मुझको
तहजीब की पूँजी मुश्किल से जोड़ी है।

कब तक नफ़रतपसंद रहोगे दोस्त मेरे
बंजारों का तम्बू है,परमानेंट थोड़ी है ।

ईमान को क्यों काँधे पे उठाये फिरते हो
अरे मेरा शहर है, शमशान थोड़ी है ।

वो मुकर गया करके बड़े-बड़े वादे
कोई नहीं इंसान है, भगवान थोड़ी है।

शहर में चर्चे है आपके कारनामो के
सब जानते समझते है, अंजान थोड़ी है।

नित नये फतवे है धर्म का कारोबार है
कोई मौलवी है सम्विधान थोड़ी है

हाथ जोड़े करता है सेवक वायदा
कातिल है, हुक्मरान थोड़ी है